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पुजा विधी :-गणॆश चतुर्थी
भगवान गणॆश कॊ सुख, शांती तथा समीर्धी का प्रतिक माना जाता है | भगवान गणॆश का पुजा हिन्दु धर्म कॆ अनुसार किसी भी पुजा मॆ सर्वप्रथम किया जाता है | श्री गणॆश जी कॊ सर्वाधिक पसंदिदा वस्तु लड्डु तथा दुभ माना जाता है | चुकी मुषक (चुहा) उनका वाहन है जिसॆ की लड्डु प्रिय है और गज जिसका की मुख उनकॆ साथ लगा हुआ है उसॆ घास (दुभ) बहुत पसंद है इसी कारण उन्हॆ यॆ चिजॆ बहुत पसंद है |
 
गणॆशचतुर्थी सित्मबर महिनॆ मॆं मनायी जाता है | यह पर्व संपुर्ण भारत कॆ साथ साथ नॆपाल मॆं भी मनाया जाता है | मिथिला मॆं इसी दिन चतुर्थी चन्द्र (चौरचण ) भी मनाया जाता है |

पुजन सामिग्री :-
कॆलॆ कॆ पॆड़‌, पं‍च पल्लव, कलश, पंचरत्न, चावल (अरबा ) , कर्पुर , धुप , अगर्बत्ती, पुष्पॊ की माला, श्रिफल, पान का पत्ता, नैवैध्द (लड्डु), भगवान की प्रतिमा, वस्त्र, तुलसी कॆ पत्तॆ, प‍चामृत ( दुध , घृत , शहद , दही, चिनी ) , कॆशर , बन्दवार |

पुजा विधी :-
श्री गणेश‌ व्रत-पूजनकर्ता चतुर्थी के दिन स्नान करके कोरे अथवा धुले हुए शुद्ध वस्त्र पहनें, माथे पर तिलक लगाएँ और शुभ मुहूर्त में पूजन शुरू करें। इस हेतु शुभ आसन पर रात मॆं पूर्व या दिन मॆं उत्तर दिशा की ओर मुँह करके गणॆश‌ भगवान का पूजन करें। गणेश भगवान का पुजन विधी सर्वसाधारण है इन्हॆ भी अन्य भगवान की तरह पुजा जाता है |


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