मिथिलालाइव साहित्य
 
MithilaLive > साहित्य‌ >>व्रत-त्योहार >>
रंगॊ का त्यॊहार हॊली
प्रॊ शिव चन्द्र झा  Powered By Wikipedia
Shiv.chandra@mithilalive.com

होली

होली
होली के अवसर पर गुलाल से रंगीन चेहरा।
आधिकारिक नाम होली
अन्य नाम फगुआ, धुलेंडी, दोल
अनुयायी हिन्दू, भारतीय, भारतीय प्रवासी
प्रकार धार्मिक, सामाजिक
उद्देश्य धार्मिक निष्ठा, उत्सव, मनोरंजन
आरम्भ अत्यंत प्राचीन
तिथि फाल्गुन पूर्णिमा
२००७ तिथि 2 मार्च
२००८ तिथि 21 मार्च
अनुष्ठान होलिका दहन व रंग खेलना
उत्सव रंग खेलना, गाना-बजाना, हुड़दंग
समान पर्व होला मोहल्ला, याओसांग इत्यादि

होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय त्योहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। रंगों का त्योहार कहा जाने वाला यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है। पहले दिन को होलिका जलायी जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहते है। दूसरे दिन, जिसे धुरड्डी, धुलेंडी या धूलिवंदन कहा जाता है, लोग एक दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि फेंकते हैं, ढोल बजा कर होली के गीत गाये जाते हैं, और घर-घर जा कर लोगों को रंग लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं। एक दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद स्नान कर के विश्राम करने के बाद नए कपड़े पहन कर शाम को लोग एक दूसरे के घर मिलने जाते हैं, गले मिलते हैं और मिठाइयाँ खिलाते हैं।[१]

राग-रंग का यह लोकप्रिय पर्व वसंत का संदेशवाहक भी है।[२] राग अर्थात संगीत और रंग तो इसके प्रमुख अंग हैं ही, पर इनको उत्कर्ष तक पहुँचाने वाली प्रकृति भी इस समय रंग-बिरंगे यौवन के साथ अपनी चरम अवस्था पर होती है। फाल्गुन माह में मनाए जाने के कारण इसे फाल्गुनी भी कहते हैं। होली का त्योहार वसंत पंचमी से ही आरंभ हो जाता है। उसी दिन पहली बार गुलाल उड़ाया जाता है। इस दिन से फाग और धमार का गाना प्रारंभ हो जाता है। खेतों में सरसों खिल उठती है। बाग-बगीचों में फूलों की आकर्षक छटा छा जाती है। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य सब उल्लास से परिपूर्ण हो जाते हैं। खेतों में गेहूँ की बालियाँ इठलाने लगती हैं। किसानों का ह्रदय खुशी से नाच उठता है। बच्चे-बूढ़े सभी व्यक्ति सब कुछ संकोच और रूढ़ियाँ भूलकर ढोलक-झाँझ-मंजीरों की धुन के साथ नृत्य-संगीत व रंगों में डूब जाते हैं। चारों तरफ़ रंगों की फुहार फूट पड़ती है।

रंगॊ का त्यॊहार हॊली कॆ बारॆ मॆं और जानिए
अपनी राय भॆजॆं | संपादक कॊ पत्र लिखॆं | मित्र कॊ बतायॆं

 

Editor Pick's

bulletमिथिलाक विकास
bulletबिहार और बिहारी एक नजर
bulletमिथिलालाइव : एक वर्ष
bulletदियॆ कॆ निचॆ अनधॆरा हॊता है

 

|

More At Editor Pick's

 

करियर

AP

 

मिशन BPSC सामान्य‌ अधय्यन

सामान्य अधय्यन किसी भी लॊक सॆवा आयॊग द्वारा आयॊजीत परीक्षा की रीढ की हड्डी हॊती...

वर्ष 2008 : नौकरियॊं की भरमार

जासूसी रोमांचक रोजगार

मैथिली कविता

bulletसब सँ सुन्‍दर अछि जगत में हमर मिथिलाधाम

bulletहमर आशानन्‍द भाई

 

|

और भी...

 

Advertise

 

 

Feed Back  -   Tell Your Friend - Terms Of Use- Privacy Policy About Us  -  Contact Us  - Careers -Advertise With Us
© Adarsh Internet Pvt. Ltd. Benipatti Madhubani All Right & Trade Mark  Reserved info@mithilalive.com  Reg No BST-00875362